सरकारी न्योता…

संतराम बजाज 

“बजाज साहिब, आप वहां दिखाई नहीं दिए?” हमारे मित्र वर्मा जी ने पूछा|

“कहाँ ”

“अरे, भई पार्लियामेंट हाउस में |”

“जनाब, हम ने कोई चुनाव आदि जीता नहीं तो हम भला वहां क्यों जाते?”

“अरे, मैं तो पार्लियामेंट हाउस में पार्टी की बात कर रहा हूँ, जहाँ यहाँ के सब प्रतिष्टित लोगों को बुलाया गया था|”

“हम कोई प्रतिष्टित लोगों में भी नहीं आते,” हम ने कह कर पल्ला झाड़ने की कोशिश की|

“मैं मज़ाक़ नहीं कर रहा हूँ|वहां ऐसी ऐसी संस्थाओं के लोग आये हुए थे, जिन के सदस्यों को उंगली पे गिना जा सकता है और वे भी उन के घर के लोग ही होते हैं, तो फिर आप की संस्था का वहां कोई भी नहीं था जबकि आप के सैंकड़ों मैम्बर हैं,” वर्मा जी ने प्रश्न उठाया जिस का मेरे पास कोई उत्तर नहीं था?

“क्या फ़र्क़ पड़ता है वर्मा जी?”

कह तो दिया लेकिन सारा दिन यही गम सताता रहा कि हमें क्यों ये सरकारी न्योते नहीं आते|क्या हम इतने ही गए गुज़रे हैं कि हम किसी गिनती में नहीं आते| फेसबुक पर कुछ लोगों की हर सप्ताह ऐसी पार्टियों में हाजरी देख देख कर हम हैरान होते रहते थे| फोटो देख कर तो ऐसे लगता है कि इन जनाब की ऊपर तक पहुँच है| 

लेकिन पिछले हफ्ते, हमें एक मित्र का फोन आया कि क्या हम उन की जगह पार्लियामेंट हाउस पार्टी में जा सकते हैं, क्योंकि वह विदेश जा रहे हैं और नया मिनिस्टर आया है, इसलिए अच्छा रहेगा|  

“अंधा क्या चाहे ? दो आँखें, हम ने झट से हाँ कर दी|सोचा,देखें वहां क्या होता हैं और इस बहाने हमारी गणना भी सम्मानित लोगों में हो जायेगी|

न्योते में लिखा था कि फॉर्मल ड्रेस, यानी सूट पहन कर आयें| अब ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में जहां लोग कच्छे-बन्यान में घूमते रहते हैं, सूट की क्या ज़रुरत? इसलिए हमारी ‘वार्डरोब’ में कोई ढंग के कपड़े नहीं मिलते |

खैर, हम ने एक पुराना सा सूट ढूँढ निकाला, लेकिन उस में से अजीब सी बू आ रही थी, इसलिए उसे धूप में डाल दिया|बॉस तो क्या दूर होनी थे, उस का रंग उड़ने लगा|जल्दी से उतार, उसे ड्राईक्लीन करवाने के लिए  ‘सेम-डे सर्वि’ पर डबल रेट पे दे दिया|दुकानदार पर रौब डालने के लिए हम ने उसे कहा कि हम स्पेशल पार्टी में पार्लियामेंट हाउस जा रहे हैं, इसलिए ज़रा अच्छी तरह से धोना| पर उस पर हमारे इस VIP स्टेटस का कोई असर नहीं हुआ, उस ने हमें अजीब नज़रों से घूरा |

दो दिन बाद पार्टी थी, इस बीच हेअर-कट कराई, बाल डाई किये, जूते पोलिश किये और जो भी मिलता उसे बताते कि हम मिनिस्टर की पार्टी में जा रहे हैं, परन्तु किसी ने भी कोई ध्यान नहीं दिया|

पार्टी वाले दिन, गेट पर सिक्यूरिटी चैक के बाद अंदर एक शनाखती कार्ड सीने पर लटका हॉल में पहुंचे|हॉल भरा हुआ था, लोग जूस, वाइन, बियर के ग्लास हाथों में लिए इधर उधर घूम रहे थे और अपने वाकिफ्कारों से बातें कर रहे थे| वेटर कुछ सनेक्स ले कर घूम रहे थे जिन्हें लोग झपट झपट कर उठा रहे थे, पीछे खड़े लोगों तक कुछ पहुँच ही नहीं रहा था|बैठने के लिए थोड़ी सी कुर्सियां पीछे दीवार के साथ लगा रखी थीं, जिन पर कुछ लोग बैठे हुए थे|यह मल्टीकल्चरल फंक्शन था, काफी देशों के चेहरे दिख रहे थे, पर भारतीय मूल के लोगों की संख्या बहुत थी| 

हम एक कोने में खड़े थे | कई एक जान पहचान वाले मिले, बड़ी गर्मजोशी से हाथ मिला रहे थे| हमें भी अच्छा लगा कि हमें भी कोई जानता है| कुछ एक आँखें भी चुरा रहे थे, क्योंकि हम जानते थे कि वे कभी हमारी संस्था से जुड़े हुए थे और अब किसी में भी नहीं थे पर पार्टियों में पहुँच जाते थे|न मालूम कैसे? शायद यही कारण था कि हमारी संस्था तक न्योते नहीं पहुँच रहे थे| 

करीब आधे घंटे बाद मंत्री जी की एंट्री हुई|बस फिर क्या था, लोगों में भगदड़ सी मच गई ,‘सेल्फी-गैंग’ ने उन्हें चारो ओर से घेर लिया और धड़ाधड़ फ़ोटो खींचने लगे|आजकल ये ‘सेल्फी’ का रिवाज बड़ा चल निकला है, हम तो इसे अभी तक सीख नहीं सके| ऑस्ट्रेलियन महिला पॉलिटिशियन तक को साड़ी पहना सेल्फी ले, फेसबुक के पन्ने भरते रहते हैं कई लोग|  

मंत्री जी भी बड़े खुश थे और पूरी बत्तीसी निकाले सब से हाथ मिलाते इधर उधर चल रहे थे|एक सरकारी फोटोग्राफर भी था, उस के पास बड़ा कैमरा था|एक व्यक्ति तो फोटो खिंचवाने का कुछ ज़्यादा ही शौक़ीन लगता था क्योंकि वह हर ग्रुपफोटो में भाग कर पीछे खड़ा हो जाता था|

मिनिस्टर ने भाषण दिया|अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनवाईं और भविष्य में क्या करने वाले हैं, उन के बारे में बोला|

देखा, बहुत से लोग अपनी बातों में मस्त थे या खाने और पीने में|

बीच में कई लोग जाने लगे, हमें भी ट्रेन पकड़नी थी, हम भी निकल लिए|

रास्ते भर सोचते रहे कि यह क्या था? समय की बर्बादी या PR exercise थी अर्थात एक औपचारिकता (फॉर्मेलिटी) थी क्या मंत्री महोदय ने जानने की कोशिश की कि कौन कहाँ से है, या क्या उस के लिए यह जानना आसान था| न लोगों ने कोई मसले सामने रखे और न ही कोई वार्तालाप|

हाँ कुछ लोगों को ‘फेस बुक’ पर फोटो डालने को मिल गईं|यह क्या कम था ? 

हम लोग उन बारातियों की तरह थे जो दूल्हे की सवारी के आगे ढोल वाले की थाप पर भांगड़ा डाल रहे थे|

क्या इस से हमारी  कोई ‘कीमत’ बढ़ गई| हम जैसे कोरे गए थे, वैसे ही कोरे वापस आ गए|

हाँ, यह बात जरूर हुई कि अब हम भी किसी दुसरे को यह कह सकेंगे कि, “आप कल पार्लियामेंट हाउस पार्टी में दिखाई नहीं पड़े, वहां प्रतिष्टित लोगों को बुलाया गया था|”


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Posted by on Aug 10 2019. Filed under Community, Featured, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Responses are currently closed, but you can trackback from your own site.

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