इस्तीफे ही इस्तीफे…..

संतराम बजाज 

“लो जी, अब सिध्धू भी इस्तीफों के ड्रामे में शामिल हो गया,” दर्शन सिंह बड़े ड्रामाई अंदाज़ में बोला| पहले राहुल अकेला था| उस ने शायद हवा में तीर फेंका था, लेकिन जब किसी और ने इस्तीफा पेश नहीं किया तो उसे शायद शक होने लगा कि कहीं उस ने अपने पाँव पर कुल्हाड़ी तो नहीं मार ली| उसे गुस्से में कहना पड़ा कि ‘क्यों नहीं और लोग भी हार की जिम्मेवारी लेते’|

“यार, दर्शन सिंह! तुम भी बिना फुलस्टाप लगाये बोले चले जाते हो|सिध्धू का राहुल के इस्तीफे से कोई कनेक्शन नहीं है, वह तो कैप्टेन अमरिंदर सिंह के साथ उस का कुछ मन-मटाव चल रहा था, उस का नतीजा है| उस ने तो पंजाब कैबिनेट से इस्तीफा दिया है|”

“पर जब उस को पता था कि राहुल अपने इस्तीफे की बात २५ मई से कर रहा है तो, उस ने १०जून को उसे इस्तीफा क्यों भेजा | क्यों नहीं मुख्य मंत्री या पंजाब कांग्रेस प्रधान को भेजा? एक महीना इंतज़ार करने के  बाद यह बात सब के सामने कह दी|किस बात का इंतज़ार था? यही ना कि राहुल अपना इस्तीफा वापिस ले लेंगे तो उस का मामला भी ठीक ठाक कर देंगे| पर सितारे कुछ गर्दिश में आ गए, थोड़ी केलकुलेशन गलत हो गई, राहुल अपने इरादे का पक्का निकला|”

“खैर अब तो करीब सारे प्रदेश-अध्यक्षों ने ख़ास कर मध्य प्रदेश से कमल नाथ, सिंधिया आदि ने इस्तीफे पेश कर दिए हैं, देखा देखी दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, गोवा से या यूं कहिये कि इस्तीफों की लाइन सी लग गई है| जैसे हर शहर की दीवारों पर ‘रिश्ते ही रिश्ते’ के बड़े बड़े पोस्टर लगते थे, ऐसे ही ये लोग दिखावे कर रहे हैं|

“ये सब ड्रामे बाज़ हैं| सब से बड़े राहुल गांधी और उस की माँ सोनिया जी| पिछली बार क्या हुआ था और उस से पिछली बार?”

“अरे नहीं भई, अब राहुल ने ‘ट्विट्टर’ पर भी लिख कर पक्का कर दिया है| कुछ भी हो, राहुल  ने एक बार जो ठान लिया, सो ठान लिया फिर वह किसी की नहीं सुनता,” मैं ने अपनी राय दी| 

“लेकिन अब क्या होगा? कांग्रेस कैसे चलेगी? उस ने तो यहाँ तक कह दिया है कि गाँधी परिवार में से कोई नहीं बनेगा, यहाँ तक कि प्रियंका भी नहीं,” अचानक मुथुस्वामी, जो हमारी बातें ध्यान से सुन रहा था, बोल पड़ा|

“होगा कुछ नहीं, वही होगा जो पहले होता आया है| अब कुछ दिनों की बजाये, साल छह महीने लगा देंगे| किसी और को बना फिर निकाल देंगे, नरसिम्हा राव और सीताराम केसरी की तरह,” दर्शन सिंह ने उत्तर दिया|

“मैं न कहता था ये सब कुर्सियों से ऐसे चिपके हुए हैं कि इन्हें छोड़ने में बड़ी पीड़ा हो रही है,” दर्शन सिंह  बोलता चला गया, “अंतरिम प्रेजिडेंट बनाने का यही मतलब है कि कोई और ‘मनमोहन सिंह’ ढूंढा जाए ताकि वह गद्दी गर्म रखे| जब एक बार फार्मूला कामयाब रहा, तो क्यों न दुबारा आजमाया जाए? एक तरफ युवा प्रेज़िडेंट की बातें करते हैं और दूसरी ओर 91 वर्षीय (वोरा जी) को बना दिया अंतरिम प्रेसिडेंट – रिस्क-फ्री| मैं तो यह कह रहा हूँ, कि राहुल ही शायद मान जाए, या फिर माता जी खुद, मेरा मतलब है सोनिया जी, नहीं तो पक्की प्रियंका होगी|”  

“दर्शन सिंह! तुम क्यों राहुल के पीछे हाथ धो कर पड़े हुए हो?,” मुझ से न रहा गया|

“कमाल है! यह आप कह रहे हैं| जबकि आप देख रहे हैं कि उस के पीछे पड़ने वालों की तादाद उस के पीछे चलने वालों से कहीं ज़्यादा है,” दर्शन सिंह खुद ही इस डायलाग पर हंसने लगा|

 मुथुस्वामी फिर बोला, “यह तो सब गड़बड़ घोटाला हो गया| सोमिया जी के बारे में सोचो, कितना धक्का लगा है उन्हें| पति की ह्त्या के बाद उन्हें प्रधान मंत्री पद मिल रहा था २००४ में| नहीं लिया, उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुन बलिदान दिया और मनमोहन सिंह को प्रधान मंत्री बना दिया | २०१४ में और अब २०१९ में, मोदी जी ने उन की आकांक्षाओं पर पानी फेर दिया और अब हालत यह हो गई है कि उन का अपना बेटा भी सत्ता से बाहर होने की बातें कर रहा है, और लोग उसे ‘रणछोड़दास-यानी लड़ाई के मैदान से भागा हुआ कह रहे हैं|”

“तुम्हें,बड़ा तरस आ रहा है उस की माँ पर, स्वामी,” दर्शन सिंह ने मुथुस्वामी को टोका, “कोई क़ुरबानी नहीं दी थी २००४ में, रिमोट कंट्रोल तो उसी के हाथ में था और साथ में ख़जाने की चाबी|त्याग की भावना न हो तो त्यागपत्र का क्या फायदा?” 

“अच्छा, एक बात नोट की है तुम लोगों ने नई पार्लियामेंट में ?”

“क्या?”

“सोनिया जी, राहुल को अब अपने पास बिठाती हैं, ताकि वह किसी को आँख-वांख या मोदी जी को जप्फी-वप्फी नहीं मारे|   

और बताऊँ, क्यों नहीं बाहर का बंदा प्रेजिडेंट बन सकता| पार्टी चलाने के लिय पैसा चाहिए, और कांग्रेस के ट्रस्ट फंड, किस के नाम पर हैं?,” दर्शन सिंह, बिना कोई नाम बताये चुप हो गया|

“मैं तो कहूंगा, कि इस परिवार की कंट्रीब्यूशन बहुत है | तीन प्रधान मंत्री दिए और उन में से दो की ह्त्या कर दी गई | अच्छा! दर्शन सिंह, तुम यह बताओ कि राहुल ने अपनी जवानी देश के लिए नहीं दी क्या? जो मौज मेले के दिन थे, वे उस ने अपनी माँ और देश के लिए बिता दिए| शादी तक नहीं की | बेचारा कभी देश से बाहर अपनी नानी से भी मिलने जाता था, तो लोग कहते थे छुट्टीयाँ मना रहा है, ऐश कर रहा है, आदि आदि|”  

“यारो, बात तो ठीक है | उस का क्या कसूर, माँ ने कहा, वह मान गया और माँ भी तो, हर दूसरी माँ की तरह  कई उम्मीदें लिए बैठी थी| शायद मैं कुछ ज़्यादा ही बोल गया था,” अचानक दर्शन सिंह ने टोन बदली|

“अब देखो, कांग्रेस के हालात बिगड़ते जा रहे हैं|दुसरे प्रदेशों में बगावतें हो रही हैं, जैसे तेलंगाना, गोवा और कर्नाटक में| इतने दिन हो गए, कोई प्रेसिडेंट बनने को तैयार ही नहीं हो रहा या कोई ढंग का व्यक्ति मिल ही नहीं रहा,” मुथुस्वामी बड़े दुखी मन से बोला|

“करीब दो महीने से कांग्रेस ‘auto pilot’ पर है अर्थात बिना ड्राईवर के चल रही है, आखिर और कब तक?

मेरी मानें तो नवजोत सिंह सिध्धू को कांग्रेस प्रेसिडेंट बना दें|झगड़ा ही ख़त्म| राहुल का करीबी है, जवान आदमी है, क्रिकेट का खिलाड़ी है, बोलता भी अच्छा है, जप्फी भी बड़ी अच्छी मारता है और भारत के काफी से ज़्यादा लोग उसे जानते भी हैं, कपिल शर्मा के शो पर बहुत देर रह चुका है,” दर्शन सिंह ने शरारत भरी नज़रों से मेरी ओर देखते हुए कहा|  

“सबर करो, सबर का फल मीठा होता है,” कह हम लोग चाय पीने लगे| 

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Posted by on Jul 19 2019. Filed under Community, Featured, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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