खुफ़िया डायरियां ..भाग २


संत राम बजाज

पूरे पांच साल बाद फिर मेरे हाथ लगी हैं कुछ खुफिया डायरियां जो भारतीय  लीडरों की हैं| पिछले लोकसभा के चुनावों के समय मैं ने उन के कुछ अंश आप के सामने रखे थे| जिन में प्रमुख नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, जो उस समय प्रधान मंत्री बनने के लिए मैदान में थे, और साथ में केजरीवाल और डा: मनमोहन सिंह की डायरियां भी थीं|

अब की बार भी कई एक हैं| आज केवल  नरेंद्र मोदी जी, जो प्रधान मंत्री हैं और कांग्रेस के प्रधान राहुल गांधी जी, जो प्रधान मंत्री बनना चाहते है, की ही दे रहा हूँ|

पहले की तरह मैं, फिर बता दूं, कि ये डायरियां, मेरे पास कैसे पहुँचीं, मैं आप को बता नहीं पाऊँगा और न ही इन की सच्चाई की कोई गारंटी दे सकूंगा|

केवल एक एक पेज ही आप के सामने पेश कर रहा हूँ|

नरेंद्र मोदी की डायरी से:

. पांच साल बीत गए यकीन ही नहीं हो रहा| ऐसे लगता है जैसे कल की बात हो|

. भई मज़ा आ गया| दुनिया घूम आया कुल मिला कर 56 बार, अरे यह तो मेरी 56 इंच की छाती से मैच कर गए, कमाल है!! अब जीतने के बाद पूरी सेंचुरी मारूंगा|

. अमेरिका तो ४ बार गया| यह वह देश है, जिस ने  एक समय मुझे वीजा देने से मना कर दिया था|

. डर है कि यह अनिल अम्बानी ना कहीं ले डूबे| डर लगता है कि कहीं यह ‘राफेल’ मुझे फेल न कर दे| अब देखा जाए तो इन पैसे वालों के बिना काम भी तो नहीं चलता, आखिर पार्टी तो चलानी है ना!

. अडवानी का काँटा तो इस साल निकाल ही दिया| पर यह योगी और प्रज्ञा अब गले पड़ गए हैं| बिना सोचे समझे बोलते रहते हैं| वैसे तो एक तरह से अच्छा ही है, कयोंकि जब जब  हिन्दुओं में जोश कम होता है तो इन के भाषण काम आते हैं|

. पुलवामा में हमारे जवान हमारी ‘सुरक्षा चूक’ के कारण मारे गए पर इस का हमें लाभ बहुत हुआ है| हम पाकिस्तान को सबक़ सिखाने का मौक़ा ढूँढ ही रहे थे, या यूं कहिये कि लोगों का नोटबंदी, १५ लाख के नारे और इस तरह के कई वादे, जो हम पूरे न कर सके पर से जनता का ध्यान हटाने का कोई मौक़ा तलाश कर रहे थे|

. अब  लोग राम मंदिर को भूल सा गए हैं और उन का ध्यान सुरक्षा मामलों में उलझ गया है| अच्छे सिआसतदान की यही तो खूबी है कि जनता को सोचने का मौक़ा मत दो|   

. ये विरोधी पार्टियों के ‘गठबंधन’ के पहले दो अक्षर यदि उल्ट दूं तो बड़ा अच्छा नाम ‘ठगबंधन’ बनता था, परन्तु सुप्रीम कोर्ट के भय से मैं ने उन्हें केवल ‘महा मिलावट’ का नाम दिया है|    

. मेरे लिए यह चुनाव जीतना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि कई अधूरे काम पूरे करने हैं| यह पप्पू मुझे चोर, चोर कह कर मेरे धैर्य को चनौती दे रहा था| लोग मुझे कहते थे कि मैं क्यों नहीं कोई वार करता| मैं मौके का इंतज़ार करता हूँ और ठीक समय पर ठीक हथियार का इस्तेमाल | राजीव गांधी को ‘भ्रष्टाचारी नम्बर वन’ कह कर, मैं ने सब की बोलती बंद कर दी है| वह कहते हैं ना, “सौ सुनार की, एक लुहार की, या यूं कहिये एक चौकीदार की|

. अब उन को मिर्ची लगी है तो, मैं क्या करूं? मैं तो यही कहूंगा कि “अभी तो पार्टी शुरू हुई है”| दिल्ली के १९८४ के सिख कत्लेआम का ज़िकर भी चल पड़ा है| वे लाख मुझे ‘दर्योधन’ कहते रहें, कोई फर्क नहीं पड़ता|   

. और राहुल  का वह बड़ा चमचा, ‘सिध्धू’, जो बड़ा बदतमीज़ हो गया है और जोर जोर से उंगली उठा कर मुझे और अमित भाई को ‘राहु और केतु’ बता रह है| वास्तव में ही हम ‘राहु-केतु’ बन कर उस का ऐसा बैंड बजायेंगे कि साला बोलने के काबिल ही नहीं रहेगा | वैसे तो उस पर तरस भी आता है क्योंकि अपनी बीवी को सीट न मिलने पर वह बावला सा हो गया है और पप्पू के आगे पीछे दुम हिलाता फिरता है|

. यह ममता भी बड़ी अजीब है, कहती है कि अब मुझे  रसगुल्लों में मिट्टी डाल कर भेजेगी | मैं ने उसे ‘स्पीड ब्रेकर’ का अच्छा नाम दिया है| अब तो ‘थप्पड़’ मारने की बकवास चालू कर रही है, क्योंकि उसे जनता के थप्पड़ दिखाई देने लग पड़े हैं|

. और वह मायावती, बेपैन्दे का लोटा है | ऐसे ही बोलती रहती है| कह रही है कि मैं भी प्रधान मंत्री बनाने के लिए तैयार हूँ|   शक्ल देखी है आईने में! यह मुंह और मसूर की दाल!!

. चलिए, आज के लिए, इतना ही|

राहुल गांधी की डायरी से:

. इस बार इलेक्शन में मोदी को बराबर की टक्कर दे रहा हूँ| राफेल ने उन की हवा सरका रखी है| पर कई बार उस की बोलती बंद करने के चक्कर में उलटा सुलटा बोल देता हूँ| क्या हुआ जो सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगनी पड़ी,नारा तो फिर भी चल रहा है|

. उस के चेले चांटे और चमचे चाहे मुझे लाख पप्पू कहें, लेकिन मुझे तो इस से कोई फर्क नहीं पड़ता बल्कि इस का बहाना बना अपनी ही पार्टी के कई लोगों को पप्पू बना चुका हूँ|

. देखा नहीं, अपने को धाँसू समझने वाले मेरे आगे पीछे कैसे राल टपकाए घुमते हैं| मनमोहन सिंह जी बोलें न बोलें, पर एक बार मुझे उन्होंने एक पते की बात बताई थी | है तो पंजाबी में पर मेरी समझ में खूब आ गई| उन्हों ने बताया,“जिंधे घर दाने, ओहंदे  कमले वी सयाने”| आप भी समझ ही गए होंगे|

. पब्लिक का क्या है, चाहे जिधर घुमा लो| अब 72 हज़ार प्रीत वर्ष देने का वादा, लोग खुशी से फूले नहीं समा रहे| यदि मोदी १५ लाख का वादा करके मुकर सकता है तो 72 हजार में क्या आपत्ति होगी, भूल जायेंगे| और फिर क्या गारंटी है कि हम जीत जायेंगे| और दूसरी बात जो सिब्बल जी ने बताई कि “जब खयाली हलवा बनाना हो, तो घी क्यों कम डालें”|

. समस्या है तो मायावती और ममता बेनर्जी की|वे कबाब में हड्डी बनने की बातें कर रही हैं|इस तरह से तो ये तीन ‘म’– मोदी. ममता और माया, मेरे लिए शनि,राहु और केतु बन गए हैं|अब तो मैं  मंदिर भी जाता हूँ, पंडित जी से बात करूंगा|

. आज मैं बहुत खुश हूँ | यूक्रेन (जो पहले सोवियेत यूनिन में होता था ) से खबर आई है कि वहां के राष्ट्रपति के चुनाव में एक टीवी कोमेडियन को ७३% वोटों की जीत से लोगों ने चुन लिया है| वह भी मेरी तरह, मेरे से छोटा ४० वर्षीय जवान है| और मैं ने शीशे में देखा, बिलकुल मेरी तरह ही लगता है| मेरी बातों पर भी तो लोग खूब हंसते हैं|

. और यह जो ‘चौकीदार चोर है’ का नारा है ना अब लोगों के खून में घुस गया है और मोदी की इमानदारी के किले में छेद कर रहा है|मेरे सलाहकार, मेरे भाषण के समय कुछ लोगों  को तैयार रखते है कि मैं जब जब बोलूँ, “चौकीदार”, तो वे जोर से बोलें ‘चोर है’| मुझे बड़ा मज़ा आता है| और अब तो बहन प्रियेंका भी आ गई हैं और उन्होंने भी इस फोर्मुले का इस्तेमाल किया है और मेरा हौसला और बढ़ गया है|

. लेकिन अब मोदी ने बहुत बड़ा पलटवार किया है | हमारे स्वर्गीय पिता जी को ‘भ्रष्टाचारी नम्बर वन’कह कर हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचाई है| छोडूगा नहीं उसे,बस प्रधान मंत्री बनने की देर है, देखना उस का क्या हाल करता हूँ, न चौकीदारी कर सकेगा और न ही चाय बेचने में काबिल रहेगा|

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Posted by on May 10 2019. Filed under Community, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Responses are currently closed, but you can trackback from your own site.

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