लौट के सिद्धू घर को आये – भाग २

संतराम बजाज

“आओ सिद्धु, आओ | कहो, कैसे रास्ता भूल गए इधर का ?”  कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिद्धू को देख कर कहा|

“कपतान साहब,  अब आप ही मेरी कुछ सहायता कर सकते हैं| मेरे सितारे गर्दिश में आ गए हैं|”  

सिद्धु बड़ी धीमी आवाज़ में बोला|

“क्यों, क्या हुआ?” अमरिंदर सिंह अनजान बनते हुए बोले|

“आप को तो पता है, मेरी बीवी ने चंडीगड़ सीट से लड़ने की इच्छा दिखाई थी परन्तु पार्टी ने चंडीगढ़ की सीट मेरी बीवी को न दे कर हारे हुए पवन बंसल  को दे दी| अब अमृतसर या कोई और सीट ऑफर कर रहे हैं| अब मेरी बीवी कोई ‘स्टिपिन्नी’ (स्पेयर टायर) तो है नहीं कि जहाँ चाहे फिट कर दें| मुझे राहुल से यह उम्मीद न थी|”   

“अच्छा!  तो अब अक़ल ठिकाने पर आई है| वैसे, तुम्हें नहीं लगता कि तुम ज़रुरत से कुछ ज़्यादा बोल गये  थे और मेरी बेइज्ज़ती कर दी |”

“यह किस ने कह दिया आप से ? मैं तो आप को अपने पिता समान समझता हूँ|”

“इसी लिए नालायक बेटे की तरह, हर बात उल्टी करते हो | तुम्हें मना किया था कि ना, कि पाकिस्तान मत जाओ | माने क्या? बल्कि मुझे कप्तान मानने से इनकार कर दिया|”

“नहीं, सर जी ! वह तो कनफयूजन हो गया| आप ठहरे आर्मी के कप्तान, मैं पार्टी चीफ यानी बड़े कप्तान की  बात कर रहा थ| मैं ने तो वही किया जो उन्होंने कहा था, लेकिन वे बाद में मुकर गए|

“ओ काका! तू अभी बच्चा है | उस कप्तान को भी पता है कि हम खानदानी राजा हैं और हमें उस की नहीं बल्कि उसे हमारी ज़रुरत है| और बताऊँ, वह टब्बर (परिवार) किसी का सक्का (वफादार) नहीं है|जब तुम्हारी ज़रुरत नहीं होगी, दूध में से मक्खी की तरह निकाल बाहर फेंकेगे| याद है मैं ने तुम्हें पहले कहा था कि जो बिक गया वह खरीदार नहीं हो सकता| उन्हें ज्यादा बोलने वाले लोग नहीं, बल्कि सरदार मनमोहन सिंह जैसे चुपचाप काम करने वाले लोग चाहियें| तुम भी ज़रा कम बोला करो|  

“और तुम ने कहा था कि, “कौन डरता है ? हम तो  फक्कड़ बन्दे हैं | किसी और पार्टी में जा घुसेंगे| ठोको जी ठोको !”

अब कहाँ गया वह तुम्हारा, ठोको-ठोको?’            

“बस राजा साहब! ज़ख्मों पर नमक न छिडकें| मैं पहले ही दुखी हूँ| पहले वह ‘सोनी’ वालों ने ‘कपिल शर्मा कामेडी शो से निकाल दिया और अब यह!”

“तो ‘माया मिली न राम’ या तुम्हारे दोस्त इमरान की भाषा में कहें तो ‘न खुदा ही मिला न विसाले सनम’ वाली बात हो गई तुम्हारे साथ|तुम्हें समझ जाना चाहिए था, जब तुम ‘करतारपुर के हीरो’ बने घूमते थे और इसी जोश में भारतीय सेना के कारनामों पर उंगली उठा रहे थे| तुम ने तो यहाँ तक कह दिया कि हमारी वायुसेना केवल कुछ पौधे ही गिरा कर आई बालाकोट हमले में| भला तुम्हें कैसे पता चला?”

“इमरान झूठ नहीं बोलता, वह पठान का बच्चा है|”
“अच्छा, तो अब भुगतो, पता है इस से कांग्रेस पार्टी को कितनी नेगेटिव पब्लिसिटी मिली है|

इसी लिये राहुल खुश नहीं है, हालांकि तुम ने काफी हिम्मत से उन की ही बातें कही थीं|”

सिद्धु ने चुप रहना ही ठीक समझा |

“अच्छा यह बता, कि तू ने पाकिस्तान में आर्मी चीफ बाजवा के साथ तो जफ्फी मारी, पर अपने खास मित्र प्रधान मंत्री इमरान से क्यों नहीं?” कैप्टेन अमरिंदर सिंह को मजा आने लगा था|

“ओ राजा साहिब, बाजवा अपना पंजाबी भरा (भाई); बस खून जोश मार गया| और फिर असली ताकत भी उसी के हाथ है| देखा एकदम करतारपुर साहिब का फैसला सुना दिया|”

“वह तो ठीक है, पर तुम तो वहां वह खालिस्तानी चावला के साथ भी फोटो खिचवाते फिरते थे|ऐसा लग रहा था कि तुम शायद पाकिस्तान के शहरी न बन जाओ|”

“आप भी मज़ाक करने लगे | फोटो  में पता नही कौन कौन आ खड़े होते थे| वह चावला, मुझे क्या मालूम वह खालिस्तानी है | मैं इतना पापुलर था कि सब सेल्फी लेने लग गए| हाँ यह मेरी दूसरी घर वापसी थी|लोगों ने बड़ा प्यार दिया,” सिद्धु भावुक होने लगे|

“तुम इतने भोले भी नहीं हो; खैर छोडो, अब यह बताओ कि मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ?”

“जी, कुछ भी करके, जैसे आप ने अपनी धर्म-पत्नी रानी साहिबा को पटियाले की सीट दिलवाई है, मेरी बीवी को भी कोई ढंग की सीट दिलवा दें| आप अपना रसूख इस्तेमाल करें तो काम बन सकता है|”    

“बस एक ही रास्ता है, सीधे दिल्ली पहुँचो और मनमटाव को भूल राहुल जी से मिलो| अब वही तुम्हारी नैय्या पार लगायेंगे|”

“हाँ, यही करूंगा | आप का बहुत धन्यवाद|”, कह सिद्धु ने ड्राईवर को दिल्ली चलने का हुकम दे दिया|

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**(पहला भाग पंजाब विधान सभा के इलेक्शन के समय पिछले वर्ष लिखा गया था|

उस समय सिधू और कैप्टन में काल्पनिक डायलागबाजी में सिधु बड़े जोश में थे | नये नये BJP छोड़ कर कांग्रेस में आये थे और राहुल गांधी के करीबी समझे जाते थे|   

उस के बाद  कांग्रेस जीती, और कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रदेश के मुख्य मंत्री बने और सिद्धू एक मंत्री|

सिद्धू का कद उस के बाद काफी बड़ा हो गया, और मोदी की तरह बड़े ज़ोरदार भाषण देते हैं|

पाकिस्तान के नये प्रधान मंत्री इमरान खान के मित्रों में है, उस की swearing ceremony पर पाकिस्तान गये थे|‘करतारपुर कॉरिडोर’ का श्रय उन्हें ही मिला है |  

लेकिन कप्तान साहिब से  उनकी अभी भी नहीं पटती | उन के विरुद्ध ही चलते रहते हैं|)

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Posted by on Apr 8 2019. Filed under Community, Featured, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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