हल, कब्बड्डी, कब्बड्डी, कब्बड्डी ……

संत राम बजाज

मुथुस्वामी, जो कि तामिलनाडू से हैं, हमारे पड़ोसी हैं और अच्छे दोस्त भी| हम अक्सर भारत के समाचारों पर विचार विमर्श करते रहते हैं| सच कहूं तो, उन की जानकारी और मामलों की पकड़  मेरे से बहुत ज़्यादा है| Facts और Figures तो उन के दिमाग में भरे रहते हैं, जैसे बटन दबाया, निकल आते हैं|

कल बड़े उत्तेजित से आये और भारत की ख़बरों की बजाये पूछने लगे, “यह कब्बड्डी क्या होता है?”

“एक खेल होता है, अरे, इस उमर में क्या शौक चर्राया  | हड्डियां टूट जायेंगी”|

“भई ! ठीक तरह से बताओ”, वे बोले|

“क्यों, क्या बात है?|”

“अरे, वे पाकिस्तान वाले कह रहे थे कि भारती जहाज़ों ने कोई नुक्सान नहीं पहुंचाया, बस आये और ४, ५ मिनट इधर उधर शोर मचा कर चले गए और जाते जाते पेड़ों में कुछ बम्ब गिरा कर चले गए और दर्शन सिंह बोल रहे थे, ‘तो वे कोई वहां रहने थोड़ा ही गए थे | बस कब्बड्डी, कब्बड्डी कहते गए और कब्बड्डी, कब्बड्डी कहते कहते वापस आ गये|”   

“अच्छा! तो यह बात है | तो सुनो, कब्बड्डी एक ऐसा खेल है जो भारत और पाकिस्तान के पंजाब में खूब खेला जाता है | दो टीमें होती हैं | इसमें दुसरे खेलों की तरह जैसे फुटबाल में बाल की या हॉकी में बाल और स्टिक या फिर क्रिकेट की तरह बाल और बैट की आवश्यकता नहीं पड़ती| बस आमतौर पर ७ खिलाड़ी एक ओर,  और ७ ही दूसरी ओर, एक घेरा बना आधे में लाइन लगा कर चालू हो जाते हैं|”

मुथुस्वामी के चेहरे पर कुछ न समझने के भाव देख, मैं रुका और फिर बोला, “जरा रुकिए, थोड़ा विस्तार से बताता हूँ| एक टीम का एक खिलाड़ी, लाइन के उस पार ऊंची आवाज़ में ‘कब्बड्डी,कब्बड्डी’ कहता हुआ जाता है और दूसरी ओर के खिलाड़ियों को हाथ या टांग से टच करने की कोशिश करता है, और अपना सांस टूटने से पहले अपने घेरे में वापस आ जाने की चेष्टा करता है| दूसरी टीम वाले उसे पकड़ने की कोशिश करते हैं| पकडे जाने पर वह खिलाड़ी आउट हो जाता है और उसे घेरे के बाहर बैठना पड़ता है|”

लेकिन मजेदार बात यह है कि यदि वह उन की पकड़ को तोड़ कर सही सलामत वापस आता है तो, जितने खिलाड़ी उस ने टच किये थे, वे सब बाहर| बस शर्त यह है कि इस बीच उस का सांस न टूटे, जो उस के मतवातर कबड्डी, कबड्डी कहने से चैक किया जाता है|

बड़ी रोचक गेम है| बड़े दिल-जिगरे वाली है|

कई प्रकार के खिलाड़ी होते हैं| कुछ एक अपनी लाइन के पास ही ‘कब्बड्डी, कब्बड्डी’ कह कर बिना कुछ जोखम उठाये वापिस आ जाते हैं, और कुछ बड़ी तेज़ी से तीर की तरह जाते हैं और एक या को हाथ या पैर लगा कर लौट आते हैं|

तीसरी किस्म के के बहुत ही बहादुर होते हैं और दुश्मन के बिलकूल पिछवाड़े पहुँच जाते और खूब शोर मचाते हुए, कई खिलाड़ियों को छू कर लौटते हैं | कई बार जब वे पकड़े भी जाते है तो भी वे उन को अपनी शक्ति से घसीट कर सेंटर लाइन को हाथ लगा लेते हैं| वे सब से दिलदार और खतरनाक माने जाते हैं|

और कुछ मेरे जैसे भी होते है कि इस से पहले कि किसी को हाथ लगाएं, पकड़े जाते हैं|

यह सिलसिला बारी बारी चलता है, यानी एक ओर से एक खिलाड़ी और फिर दूसरी ओर से एक खलाड़ी|

आउट हुए खिलाड़ी उसी हालत में वापिस आ सकते हैं, जब दूसरी टीम का खिलाड़ी आउट हो, तो अदला बदली हो सकती है”|

“तो दर्शन सिंह ठीक बोल रहा था,” मुथुस्वामी मेरा कब्बड्डी पर दिया हुआ व्याख्यान सुन कर बोले|

“यह तो ऐसा लगता है कि जैसे भारत और पाकिस्तान में कबड्डी खेली जा रही है|”,

“पुलवामा हमले के तरुंत बाद भारत ने पाकिस्तान की सीमा में घुस कर आतंकवादियों के ठिकानों पर हवाई हमले किये और जवाब में पकिस्तान ने कश्मीर में घुसने की कोशिश की, भारत ने फिर जवाबी कार्रवाई की| और दोनों ने एक एक लड़ाकू जहाज गंवाया | भारत का तो एक पायलेट, विंग कमांडर अभीनन्दन पकड़ा भी गया| आप को मालूम है वह हमारे प्रदेश तामिल नाडू का है| वह दर्शन सिंह हम को हर बार बोलता कि मद्रासी लोग केवल दफ्तरों में बाबूगीरी कर सकता है| अब देखा हम, मद्रासी लोग भी कितने बहादुर होते हैं, मिग-21 से F-16 को मार गिराया, जी,” मुथुस्वामी गर्व से बोले|

इस बीच दर्शन सिंह की एंट्री हो गई | “ओ स्वामी, मेरे खिलाफ क्या बोल रहा है| मैं ने सब सुन लिया है,” दर्शन सिंह ने हँसते हुए कहा|

“भई स्वामी मान गए, इस हीरो ने कमाल किया है, वास्तव में कब्बड्डी के उस निडर खिलाड़ी की तरह जो दूसरी टीम के अन्दर घुस कर वार करता है और वापिस आता है| थोड़ी गड़बड़ी अवश्य हो गई थी कि उस का प्लेन टूट गया, पर न उस का सांस टूटा और न ही उस का साहस| पकड़े जाने पर भी उस ने बड़ी दृडता से काम लिया|और जानते हैं बहुत से नौजवान उस की मूंछों से बड़े प्रभावित हुए हैं | सुनते हैं अब वैसी ही मूंछों का फ़ैशन चल पड़ा है”|

मैं बोला, “मामला काफी गंभीर है, संवेदनशील है| कितने सैनिकों और दूसरे लोगों की जानें गई हैं| इस लिए अब यह केवल कब्बड्डी का खेल नहीं रहा है| हाँ ! दोनों देशों में ऐसे बहुत से लोग, ख़ास तौर पर ये टी.वी. चैनल हैं जो ‘बदला, बदला’ की रट लगा कर इसे कबड्डी का खेल ही बना कर जनता की भावनाओं से खेल रहे हैं|”

“हां, भारत में सियासी पार्टियां ज़रुर आपस में कब्बड्डी खेल रही हैं| चुनाव जो आ रहे हैं| जरा पार्टी के ज़िम्मेदार लोगों के भड़कीले भाषण सुनिए ! कोई कहता है हम ने ३०० मार दिए, कोई कहता है केवल वृक्ष गिरा कर आ गये, अर्थात वे एयरफ़ोर्स पर ही शक कर रहे हैं| कैसे जनता को बुध्दू बना रहे हैं,” मुथुस्वामी ने अपनी राये दी|

दर्शन सिंह भला कहाँ चुप रहने वाला था, बोला, “ठीक कहते हो स्वामी, ये सियासी पार्टियां  भी खेल तो कबड्डी ही रही हैं, पर एक ओर खिलाड़ी है एक  और दूसरी ओर 21|  कहाँ का इन्साफ है? और फिर केवल  जप्फी और आँखें मारने से काम नहीं चलता, पकड़ होनी चाहिये| समझ गए हैं ना, मैं क्या कह रहा हूँ| खुद तो कुछ करते नहीं और दूसरा कोई करे तो उसे भी रोकते हैं, शान्ति-दूत  और आहिंसा के पुजारी बने बैठे हैं| क्या आतंक-वादियों के सारे  हमले भूल गये| पार्लियामेंट पर हमला, मुम्बई आतंकवादी हमला, पठानकोट, यूरी, और अब यह पुलवामा| बात चीत से फैसले नहीं हो रहे हैं| यारो, हद होती है, सबर की| अब ‘जैश-ए-मुहम्मद’ को जड़ से उखाड़ने का समय आ गया है| और उसे बढ़ावा देने वालों को सबक़ सिखाने का भी,” दर्शन सिंह कुछ ज़्यादा ही जोश में आ गया| उस का चेहरा लाल हो गया|  

मैं ने उसे  ठंडा करने करने के लिए कहा , “जैश-ए-मुहम्मद पर ज़्यादा जोश दिखाने की ज़रुरत नहीं, बल्कि होश से काम लेना होगा| ऐसे में जंग छिड़ सकती है|”

“छिड़ती है तो छिड़ जाए, आप डरते होंगे जंग से,” बोले दर्शन सिंह|   

“बात डरने और न डरने की नहीं है| इस समय जंग किसी के भी हित में नहीं है, न भारत के और न पाकिस्तान के| पाकिस्तान ने इतनी जल्दी हमारे विंग कमांडर को छोड़ कर इस तरह के संकेत तो दिए हैं| और अब कुछ आतंकवादियों को भारत की दी हुई लिस्ट के आधार पर हिरासत में ले लिया है, जिस में जैश-ए-मुहम्मद के मौलाना मसूद अजहर का भाई और बेटा भी हैं,” मुथुस्वामी ने दर्शन सिंह को समझाते हुए कहा|,

“एक बात तो है कि, बार्डर पर हमारी तैयारी देख कर वे समझ गए हैं कि भारत से भिड़ना आत्महत्या होगी, और फिर अमेरिका और चीन भी इस लड़ाई के हक में नहीं हैं|

“छड्डो जी, आपे मोदी संभाल लेगा, आप जरा चाय वाये का इंतजाम करो,” दर्शन सिंह का मूड बदल चुका था, उस  ने हँसते हुए कहा |

और हम सब निश्चिन्त और संतुष्ट हो चाय की चुस्कियां लेने लगे|

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Posted by on Mar 7 2019. Filed under Community, Featured, Hindi. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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