हमारी ऐनक

संतराम बजाज

हमारी ऐनक भी सब की तरह एक आम ऐनक है| वही दो शीशे, एक फ्रेम जो नाक पर टिकता है |आँखों की कमजोरी दूर करने के लिए डॉक्टर की सलाह पर लगाई है| वाकई साफ़ दिखता है इसलिए बराबर पहने रखते हैं| शुरू शुरू में तो कुछ अजीब सा लगा, जमीन ऊंची नीची दिखाई दी और कई बार गिरते गिरते बचे|

पर यह तो बहुत पहले की बात है, अब तो इस की इतनी आदत पड़ चुकी है कि इस के बिना हम घर से बाहर निकलते ही नहीं| घर के अंदर तो लगाए ही रखते हैं और कई बार तो सोते समय भी उतारना भूल जाते हैं और अक्सर मजाक में कहते हैं कि इस से रात को सपने बड़े साफ़ दिखाई देते हैं|

मुसीबत उस समय आती है जब हम इसे इधर उधर रख देतें हैं और फिर भूल जाते हैं कि कहाँ रखी है| जैसे   बाथरूम में मुंह धोया, ऐनक उतार कर वहां रखी और किचन में आ गये | थोड़ी देर बाद जब ज़रुरत पड़ी तो बाथरूम के इलावा सब जगह ढूंढते फिरेंगे, यहाँ तक कि किचन में जहां चमच और फोर्क रखते हैं उस कैबनेट में भी| बिना ऐनक लगाये ऐनक को तलाशना कोई आसान काम है क्या?

आखिर घर के दुसरे सदस्यों की सहायता से ऐनक खोज निकाली जाती है|

जैसे कुत्तों के गले में एक पट्टा सा डाला जाता, उसी तरह की एक डोरी, जिसे शायद ताल-पट्टियाँ या ताल-कॉर्ड (eyeglass strap) कहते हैं दोनों किनारों से बाँधदूसरा हिस्सा गर्दन के पीछे से ला एक तरह का strap ही तो है, जो इस बात की गारंटी करता है कि कि ऐनक अब कहीं नहीं जायेगी, लेकिन हम भला ऐसे बन्धनों में कैसे बंध सकते हैं | एक ही दिन में डोर कहां और ऐनक कहाँ?

कई बार तो हद ही हो जाती है कि ऐनक माथे पर होती है और हम इधर उधर हाथ मार रहे होते हैं|

मेरी यह बात ऐनक पहनने वाले अच्छी तरह से समझ रहे होंगे, क्योंकि यह मेरे अकेले के साथ ही नहीं होता, दूसरों से भी मैं ने सुना हुआ है|

लेकिन असली मुसीबत तो तब आती है, जब यह ऐनक टूट जाये| टूटने के कई कारण हो सकते हैं| हाथ से गिर जाए या किसी बच्चे के हाथ जाए और वह उसे मरोड़ दे खिलौना समझ कर|

लेकिन कभी कभार ऐसा हो जाता है कि आप को अपने-आप पर गुस्सा और रोना आता है|

पिछले सप्ताह ऐनक ढूँढने पर भी नहीं मिल रही थी, सारे परिवार वाले भी परेशान थे और हम कुर्सी पर बैठे हाय तोबा मचा रहे थे| मायूस हो कर कुर्सी से उठे तो अजीब सी आवाज़ ने सब को चौंका दिया| हमारी ऐनक बेचारी चकनाचूर हालत में कुर्सी पर पड़ी तड़प रही थी, क्योंकि हम उस पर इतनी देर से बैठे उधम मचा रहे थे|

सब के सामने अच्छी खासी शर्मिन्दगी उठानी पड़ी और नई ऐनक बनवाने का खर्चा अलग !

नई बनाने में भी आजकल कुछ परेशानियां आने लगीं हैं| नये नये फैशन के फ्रेम, कई रंगों के फ्रेम यानी गोल्डन मैटल फ्रेम अथवा प्लास्टिक में ब्राउन या काला आदि आदि|

धूप में रंग बदलने वाले लेंस, रात को पढने के लिए नज़दीक की नज़र वाला चश्मा और खो जाने या टूटने की सूरत में एक स्पेयर ऐनक!

एक बात और, साफ़ देखने के लिए शीशों को साफ़ रखना बहुत ज़रूरी, पर बहुत ही कठिन काम| कितना भी रगड़ लो, टिशु पेपर से या रूमाल से, साफ़ हो कर ही नहीं देते, बल्कि पहले से भी गंदे और धुंधले हो जाते हैं| एक स्पेशल प्रकार का छोटा सा कपड़ा रखना पड़ता है जो ज़रुरत के समय कभी नहीं मिलता!    

अच्छा, ऐनक का भूलना और खो जाना तो अब नई बात रही नहीं, लेकिन इस का चोरी हो जाना?

यह भी हमारे साथ हो चुका है|

हम swimming pool पर पानी में अपने घुटनों के व्यायाम के लिए जाते हैं और उस के बाद वहीं से शावर लेकर आते हैं| उस समय ऐनक को बैग के साथ बाहर रख देते हैं| कई बार ऐसा किया, बिना सोचे कि हमारे गोल्डन फ्रेम वाले नये और कीमती चश्मे पर किसी की बुरी नज़र पड़ सकती है|

लेकिन एक दिन जूँही नहा कर बाहर निकले ऐनक गायब| इधर उधर तलाश किया और जैसे ऐसे मौकों पर हर एक करता है कि उन जगहों में भी ढूंढा, जहां आदमी गया भी न हो| अर्थात, दुसरे शावर और toilets में भी| Reception पर बैठी लड़की से बात की, दूसरे लोगों से भी पूछताछ की, शायद किसी ने शरारत न की हो या गलती से अपनी ऐनक समझ कर उठा ली हो|

परन्तु ऐनक का कुछ पता न चला|

अब जिस चोर-भाई ने यह हरकत की, उस ने यह नहीं सोचा कि उस के बिना हम देखेंगे कैसे (क्योंकि वह कोई  धूप वाला काला चश्मा तो था नहीं), हम कार कैसे चलाएंगे और घर कैसे जायेगे|

हमारी शब्दावली (vocabulary) में जितनी गालियाँ थीं, हम ने उसे दे डालीं|

किन्तु साथ साथ उस चोर का धन्यवाद भी किया कि हमारा पूरा बैग, जिस में हमारे कपड़े और तौलिया आदि थे, नहीं ले उड़ा|

नहीं तो ??

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Posted by on Aug 25 2018. Filed under Community, Featured, Hindi. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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