ये काले काले बाल …   

संतराम बजाज

जब करीब करीब अपनी ही उम्र के लोग आप को अंकल ( uncle)  बुलाना शुरू कर दें  तो बात चिंताजनक  है|

एक बार एक  बड़े  भारी  समारोह में गए, वहां काफ़ी लोग  आए हुए थे | हम ज़रा  वक़्त से पहले पहुँच गये तो बाहर  खड़े हुए थे | आने वालों से नमस्ते आदि का आदान प्रदान हो रहा था |

एक अधेड़ उम्र की देवी ने हमें ‘नमस्ते अंकल’ कहा | हम ज़रा चौंके, पर चुप ही रहे| उसके पीछे आती हुई लड़की हमारी जान पहचान की थी, उस ने ‘नमस्ते अंकल’ कहा और पहले वाली औरत का परिचय कराया, “यह मेरी मम्मी हैं जो अभी भारत से आई हैं|”

“न ही आती तो अच्छा था”, हम कहते कहते रुक गए|

अरे इतनी भी तमीज़ नहीं कि ‘भैया’ या ‘भाई साहब’ कह कर बुला लो, सीधे ही अंकल |

एक बार तो हद ही हो गई हमारी (स्वर्गीय) धर्म पत्नी के पास  खडी थी उन की एक सहेली, जो हम से पहले नहीं मिली थी| वे  दोनों अपने अपने  परिवार के बारे में बातें करने लगीं | और अचानक ही हमारी ओर इशारा कर के पूछ लिया, तो ‘आप के पापा भी यहाँ आये हुए हैं’|

अब हमारी श्रीमती जी का जो हाल हुआ सो हुआ, हमारी हालत देखने वाली थी| हम वहां इतना भी नहीं रुके कि देख सकें कि हमारी पत्नी की वह सहेली सच जान कर किस पल्लू में मुंह छिपा रही थी|

इधर हमारी टेंशन भी इतनी बढ़ गई की जो शायद भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर भी न हो|

कुछ तो करना होगा, ऐसा सोच हम ने बालों को काला करने की ठानी|

नेचुरल तरीके से करें, ऐसा हम ने निश्चय किया| इसलिए हम ने स्वामी  रामदेव के योग का सहारा लिया| YouTube पर जा उन के विडियो देखने शुरू किये|

उन्होंने कई प्रकार के आसन  बताए – प्राणायाम,  लोम-विलोम, कपालभाती, सर्वांगासन और सब से बढ़कर शीर्षासन |  इसके इलावा उन्होंने खाने के लिए हरी सब्ज़ियां, फ्रूट और उनका जूस जैसे लौकी, गाजर और सेब का जूस | उस में तुलसी की ७ पत्ती, पुदीने की ७ पत्ती, तीन चार काली  मिर्च भी डाल लें और प्रतिदिन पियें| त्रिफला जिस में आमला प्रधान होता है, यह एक चमच प्रतिदिन जरूर लें, बहुत लाभदायक होगा|

अर्थात आसनों और आहार संतुलन से बाल काले हो जायेंगे और झड़ेंगे भी नहीं | इस के साथ साथ उन की कम्पनी ‘पितांजलि’ का ’दिव्य केश’ तेल और ‘केश कान्ति’ शेम्पू भी लगाएं| उन्होंने तो प्याज का तेल और नारयल का तेल भी प्रयोग करने को कहा था, पर हिम्मत नहीं पड़ी कि मोहल्ले भर में उन की ‘महक’ फैलाता फिरूं|

स्वामी जी के दिए आश्वासनों के अनुसार, यदि मैं यह सब करूंगा तो सफेद बाल काले हो जायेगे और नये बाल भी उगने लगेंगे|

आसान नहीं था पर हम ने यह सब किया, परन्तु कोई बात नहीं बनी| उलटा शीर्षसन कर कर के सिर के शेष बाल भी उड़ने लगे| अर्थात, स्थिति पहले से भी ज़्यादा गंभीर होने लगी|

एक बात तो बतानी भूल ही गया| स्वामी जी ने कहा था कि दोनों हाथों के नाखूनों के पिछले हिस्सों को आपस में ५ मिनट तक  खूब रगड़ें तो इस से ऊर्जा पैदा होगी जिसके फलस्वरूप नए बाल उगने शुरू हो जायेंगे| बस ध्यान रहे कि अगले हिस्से के नाख़ून न रगड़ें, नहीं तो कान पर बाल उग आयेंगें औए स्त्रीयों को तो दाढ़ी मूंछ तक निकल सकती हैं|

मैं बस इतना कहूंगा कि हमारे बाल तो नहीं उगे, हाँ नाखून खूब बढ़ गए जो बार बार काटने में परेशानी उठानी पडी|

अंत में बालों को ‘डाई’ करने का फैसला करना ही पड़ा|

इसमें कोई शर्म वाली  बात नहीं थी|  वैसे तो भारत में  बाल रंगना बड़ी देर से चल रहा

है| आमतौर पर लोग पौधों या जड़ी बूटियों से काम चलाते थे, जैसे मेहंदी (हिना), हल्दी और आमला वग़ैरह को mix करके, और उसमें शायद बादाम या अखरोट के छिलके को जलाकर, पीसकर एक मिक्सचर  बनाते थे और फिर उस का लेप बालों पर लगाते थे| मेहंदी से बाल लाली पकड़ लेते थे|

आजकल मेहंदी में कुछ और मिला कर काला बना लिया जाता है|

विश्व के सारे देशों में आजकल बाल रंगना, ख़ास तौर पर नौजवानों में, एक  फैशन बन गया है| कोई भी रंग हो—नीला, पिंक, और सुनहरी आदि आदि सब चलते हैं, हर हफ्ते नया रंग|

लेकिन हमें तो अपनी मजबूरी के हिसाब से बालों को डाई करना था – यानी केवल काला|

सोचा किसी ‘हेयर सैलून’ में  जा कर डाई करा लें, परन्तु उन के रेट पढ़ कर ही घबरा गए और उलटे पाँव घर वापस | फिर सोचा, कौन सा मुश्किल काम है, खुद ही कर लेंगे| एक काले रंग की  ट्यूब, एक लगाने वाला ब्रश, और बाद में शैम्पू और कंडीशनर|

खैर बाज़ार से ही एक मशहूर कम्पनी का permanent colour का एक पैक ले आये|

उस पैकट में दो टयूब- एक कलर की और दूसरी developer की, एक सैट प्लास्टिक के दस्ताने, एक कंघी नुमा हार्ड सा ब्रश था |

उन की लिखी विधि के हिसाब से एक कटोरी में दो ट्यूबों से बराबर बराबर मात्रा में पेस्ट निकाल उन्हें मिक्स किया |

कंधे पर एक पुराना सा टॉवेल लपेटा, हाथों में प्लास्टिक के दस्ताने, जो उनहोंने साथ ही दिए थे निकाल कर पहने |

ऐसे लग रहा था जैसे हम किसी अस्पताल में कोई ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर हों|

खैर साहिब, हम ने वह पेस्ट ब्रश से लगाना शुरू किया| पहले मूंछों को लगाया काफ़ी आसान था|

इस के बाद सामने वालों बालों को लगाया| वहां बाल कुछ कम थे, इसलिए बड़ी सावधानी बरतनी पडी, पर  फिर भी बालों के नीची की त्वचा भी काफी काली हो गई|

मुश्किल तब पैदा हुई जब side और पीछे  के बालों की ओर ब्रश लगाने लगे | पीछे का तो कुछ दिखाई

ही नहीं पड़ रहा था| रंग कान पर जा लगा | उसे साफ़ करने के चक्कर में ब्रश हाथ से निकल कर बाथरूम के फर्श पर जा गिरा| अब बाथरूम की टायलें कहीं रंग न पकड़ लें, इस डर से उन्हें साफ़ करना ज़रूरी हो गया|

फर्श से उठ कर जब शीशे में देखा तो करीब करीब चीख़ ही निकल गई| क्योंकि रंग मूंछों के साथ साथ  नाक और गालों पर भी लगा चुका था | मूंछों का पूछिए ही मत, बिलकुल रावन की मूंछों की तरह लग रहीं थी – काली और भयानक|  तौलिया गीला कर, अब लगे रगड़ने उन सब स्थानों को, जहां जहां रंग को नहीं होना चाहिए था| इस अभ्यान में कई जगहों के बाल भी उड़ गए|

Hydrogen peroxide की शीशी करीब आधी खाली कर दी लेकिन पूरी सफलता नहीं मिली|       नहाते समय, शैम्पू और कंडीशनर भी खूब लगाया लेकिन बात न बनी | बल्कि नहाते समय डाई और शैम्पू आँखों में घुस गये और वे बड़ी दुखने लगीं| पानी से काफी छींटें लगाए और हाथ से मल मल कर धोना पड़ा जिस से वे बहुत लाल हो गईं|

घर से बाहर निकले, तो लोग हंसेगे, इसलिए दो दिन घर के अन्दर ही पड़े रहे| तीसरे दिन सिर पर टोपी पहन कर कुछ देर के लिय निकले|

कुछ दिनों के बाद सब ठीक ठाक हो गया, बल्कि यार मित्रों ने बड़ी प्रशंसा की कि हम ने अच्छा किया है|

अब हम पहले से ‘यंग’ लगते हैं| हो सकता है उन की यह ‘यंग’ वाली टिप्पणी व्यंग्यात्मक ही हो, पर हमें अच्छी लगी|

लेकन जब से बाल काले करने शुरू किये, कुछ और तरह की परेशानियां होने लगी हैं|

बस में या ट्रेन  में कोई सीट ही नहीं देता| अगर ढीठ हो कर किसी से सीट के लिए request करें भी तो हमारे बालों की ओर देख मना कर देते  हैं|

अब हालत यह है की टांगें चाहे सूज जाएँ, हम किसी से सीट के लिए नहीं कह पाते|

पिछली बार concession लेने के लिए जब हम ने अपना senior card दिया तो उस ने photo ID की मांग की|

“Photo ID क्यों?”, हम ने पूछा |

उस ने हमारे काले बालों की ओर देख कर कहा कि  “just checking”; शायद कहना चाह रहा था, “सीनियर लगते नहीं हो”|

हमें उस पर गुस्सा नहीं आया |

“थैंक यूं“, हम अन्दर ही अन्दर खुश थे कि चलो हम उसे ‘अंकल’ तो नहीं दिखे|

 

 

Short URL: http://www.indiandownunder.com.au/?p=10273

Posted by on Dec 23 2017. Filed under Community, Featured, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Responses are currently closed, but you can trackback from your own site.

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